सत्य सनातन मिशन ट्रस्ट के कार्य
आदरणीय बन्धुओं सत्य सनातन मिशन न्यास एक आध्यात्मिक एवं मानव कल्याण हेतु कार्य करने वाली निःस्वार्थ संस्था है, जो शिव गुरु श्री विजय जी महाराज के आदेश पर वर्ष 2024 से कार्यशील है।
सनातन धर्म अनंत काल से हमें ज्ञान और मोक्ष का मार्ग दिखाता है. हमें सद्बुद्धि प्रदान करता है. इसके मूल में दया, सहिष्णुता, अहिंसा, तपस्या आदि है. सत्यं, शिवम् और सुंदरम् की परिभाषा है. हिंदू धर्म ही एकमात्र धर्म है जो संपूर्ण ब्रह्मांड में ईश्वर, आत्मा और मोक्ष का ज्ञान कराता है. मोक्ष से जीवन सफल होता है. जप, तप, ध्यान, नियम, पूजा-पाठ पुण्य कर्मों से संचित व्यक्ति का जीवन ही सफल होता है.
यदि आप धर्म की अभिवृद्धि एवं मानव कल्याण हेतु कार्य करने की अभिलाषा रखते हैं और बिना पारिश्रमिक, बिना लोभ-लालच के तथा बिना मान-सम्मान की अभिलाषा के स्वेच्छा से एक सप्ताह में कम-से-कम दो से तीन घन्टे दे सकते हैं एवं नीचे बताये गये सत्य सनातन मिशन के एक या एक से अधिक उद्देश्य से सहमत हैं और स्वेच्छा से शिव गुरु श्री विजय जी महाराज के शिवदूत बनने के लिये सहमत हैं तो कृपया सत्य सनातन मिशन की वेबसाइट www.satyasanatanmission.in पर जाकर सत्य सनातन मिशन ट्रस्ट के उद्देश्य एवं कार्य के काॅलम को क्लिक कर शिव दूत सदस्यता फार्म भर, सदस्यता ग्रहण कर सकते हैं तदोपरान्त शिव गुरु श्री विजय जी महाराज ओर से प्राप्त सन्देशों को सत्य सनातन मिशन द्वारा आप तक पहुँचाने का कार्य किया जायेगा।
शिवत्व की पुर्नस्थापना
रुद्राक्ष धारण के लाभ
- रुद्राक्ष भगवान् शिव का साक्षात् स्वरुप है।
- रुद्राक्ष अकाल मृत्यु हारी है।
- रुद्राक्ष दीर्घायु प्रदान करता है।
- रुद्राक्ष धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का प्रदाता है।
- रुद्राक्ष धारण से स्त्रियों को अवश्य पु़त्र लाभ होता है।
- रुद्राक्ष की पूजा से सभी दुःखों से मुक्ति मिलती है।
- रुद्राक्ष धारण करने पर वह सभी वर्णों के पापों का नाश करता है।
- रुद्राक्ष धारण करने वाले को भूत, प्रेत, पिशाच, डाकिनी-शाकिनी आदि से होने वाली बाधाओं से छुटकारा मिल जाता है।
- 108 दाने वाली रुद्राक्ष माला धारण करने वाले व्यक्ति को क्षण-क्षण में अश्वमेघ यज्ञ का फल प्राप्त होता है।
- दुनियाँ का महँगे-से-महँगा रत्न भी गुणों में रुद्राक्ष की बराबरी नहीं कर सकता ।
- वैज्ञानिक परिक्षणों से यह प्रमाणित हो गया है कि, रुद्राक्ष में रक्त चाप, मधुमेह, गुर्दा, हृदय आदि जैसे अनेक रोगों को नियंत्रित करने की क्षमता है।
विश्व साम्ब सदाशिव परिवार
किन्तु इस समस्या का समाधान शिवपुराण में दिया गया है, इसलिये यह आवश्यक है, कि जिन लोगों ने अन्तरजातीय विवाह किया है वे भगवान् शिव की उपासना करें एवं ‘‘विश्व साम्ब सदाशिव परिवार ‘‘ के सदस्य बन जायें तथा उसी परिवार में भविष्य में शादी-सम्बन्ध, रोटी-बेटी आदि के सम्बन्ध स्थापित करें। इससे जहाँ एक ओर आपके घर में सुख-शान्ति आयेगी वहीं दूसरी ओर कलियुग के दुष्परिणाम से आप सुरक्षित रहेंगे और यथा शीघ्र कलियुग की समाप्त एवं सतयुग के आरम्भ होने में आपका महत्वपूर्ण योगदान होगा। तथा विश्व में शान्ति एवं सद्भाव का वातावरण होकर ‘‘बसुदेवकुटुम्भकम्‘‘ की अवधारणा मूर्तिरूप लेगी। एवं जाति विहीन ब्रह्म ज्ञानी समाज का विश्व में निर्माण होगा।
इस अनुष्ठान को पूरा करने के लाभ
- इस पूजा और यज्ञ, ध्यान, ज्ञान ,मुद्रा, योग विज्ञान को करने से अचानक मृत्यु, ब्रेन स्ट्रोक, हृदय प्रत्यारोपण के रोग, गुर्दे की पथरी, फेफड़ों में संक्रमण, थायरॉयड, स्त्रीरोग संबंधी समस्याएं, गठिया और हड्डियों की समस्याएं दूर हो जाती हैं।
- यह त्वचा संबंधी समस्याओं और दांतों की समस्याओं को भी दूर करता है।
- गंभीर और लंबी बीमारी से राहत मिलती है।
- धैर्य, जीवन शक्ति, आंतरिक गुणवत्ता और महान कल्याण देता है।
- सभी प्रकार की बीमारियों से बचाता है और प्रतिरोधक क्षमता में सुधार करता है। इस अनुष्ठान को करने के आध्यात्मिक लाभ
- पूजा करने वालों को रोग, संकट और खतरों से मुक्ति मिलती है
- रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और दीर्घायु प्रदान करता है।
- बीमारियों से बचाता है और स्वास्थ्य में सुधार करता है।
- चोरी, दुर्घटना और अचानक मौत से अत्यधिक सुरक्षा के लिए।
- मानसिक और शारीरिक समृद्धि लाता है।
- इससे भय, तनाव, मानसिक और शारीरिक बीमारियों से भी राहत मिलती है। इस अनुष्ठान को करने से स्वास्थ्य लाभ
- रोगों से मुक्ति के लिए
- यह पूजा और यज्ञ बीमारियों और मृत्यु के भय को दूर करने में मदद करता है।
- इससे अन्न, आरोग्य, धन और यश की प्राप्ति होती है।
- विभिन्न बीमारियों और व्याधियों से राहत और सुरक्षा देता है।
- पूजा करने वालों को रोग, संकट और खतरों से मुक्ति मिलती है